वार्षिक अमरनाथ यात्रा, जो इस साल 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होनी थी, उसे समय से एक सप्ताह पहले 3 अगस्त को स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय भारी बारिश और यात्रा मार्गों की खराब हालत के कारण लिया गया है। आइए इस खबर को विस्तार से समझते हैं:

#यात्रा स्थगित करने के प्रमुख कारण

– #भारी बारिश का प्रभाव : जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में हुई भारी बारिश के कारण यात्रा के दोनों मुख्य मार्ग – बालटाल और पहलगाम – क्षतिग्रस्त हो गए थे। बारिश के कारण मार्गों पर भूस्खलन और सड़कों को नुकसान पहुंचा है ।

– #मरम्मत कार्य की आवश्यकता : कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर विजय कुमार बिधूड़ी ने बताया कि मार्गों की तत्काल मरम्मत और रखरखाव की आवश्यकता के चलते यात्रा को रोकना पड़ा। मरम्मत कार्य के दौरान यात्रा जारी रखना संभव नहीं था ।

– #सुरक्षा चिंताएं : खराब हुए मार्गों पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि असुरक्षित मार्गों पर यात्रा जारी रखना जोखिम भरा होता ।

#इस साल के यात्रा आंकड़े

– #तीर्थयात्रियों की संख्या : इस साल अब तक लगभग 4.10 से 4.14 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं ।

– #पिछले साल के आंकड़े : 2024 में 5.10 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए थे, जबकि 2023 में यह संख्या 4.5 लाख थी ।

– #सुरक्षा व्यवस्था : इस साल यात्रा के दौरान लगभग 50,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जिसमें CRPF जवान भी शामिल थे ।

#यात्रा का इतिहास और महत्व

– #ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : अमरनाथ यात्रा की जड़ें 1850 के दशक में बोटा मलिक नामक एक मुस्लिम चरवाहे द्वारा गुफा की खोज से जुड़ी हैं। यह कश्मीर की समन्वित संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है ।

– #धार्मिक महत्व : अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाली बर्फ की शिवलिंग को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी ।

– #पिछले वर्षों की अवधि : 2024 में यह यात्रा 52 दिनों की थी, जबकि 2023 में 62 दिन, 2022 में 43 दिन और 2019 में 46 दिनों तक चली थी। 2020-21 में कोरोना महामारी के कारण यात्रा स्थगित रही थी ।

#अन्य प्रभावित क्षेत्र

भारी बारिश का प्रभाव सिर्फ अमरनाथ यात्रा तक ही सीमित नहीं था:

– हिमाचल प्रदेश में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 387 सड़कें बंद हैं ।

– उत्तराखंड के चमोली में भूस्खलन से 12 मजदूर घायल हुए ।

– पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बाढ़ से हालात बिगड़े हैं, जहां सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है ।